सीतामढ़ी: बाजपट्टी स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन की कमी से शिक्षक की मौत, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल
सीतामढ़ी: बाजपट्टी स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन की कमी से शिक्षक की मौत, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल
बाजपट्टी (सीतामढ़ी): बिहार के सीतामढ़ी जिले के रामफल मंडल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बाजपट्टी में ऑक्सीजन की अनुपलब्धता ने एक और जान ले ली। इस बार शिकार हुए एसआरपीएन उच्च विद्यालय, बाजपट्टी के शिक्षक मनोज कुमार, जिनका इलाज के दौरान ऑक्सीजन की कमी के चलते निधन हो गया। यह घटना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ताहालत और सरकारी दावों की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
घटना का विस्तृत विवरण
शिक्षक मनोज कुमार (45 वर्ष) की तबीयत रविवार देर रात अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें तुरंत रामफल मंडल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को नाजुक बताते हुए ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत बताई। लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर ऑक्सीजन मौजूद नहीं थी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने वैकल्पिक उपायों से स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण शिक्षक की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।
सरकारी दावों पर बड़ा सवाल
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खोलती है। सरकार का कहना है कि सभी सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, ऑक्सीजन, और उपकरण उपलब्ध हैं। बावजूद इसके, बाजपट्टी CHC में ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध न होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि अगर अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गया था, तो इसकी आपूर्ति के लिए समय रहते कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? आखिर ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन होगा?
परिवार और समाज में शोक की लहर
मनोज कुमार अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मृत्यु से परिवार पर गहरा आर्थिक और भावनात्मक आघात पहुंचा है। उनके सहकर्मियों और छात्रों ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनके एक सहयोगी ने कहा, "मनोज जी न केवल एक कुशल शिक्षक थे, बल्कि छात्रों के बीच एक प्रेरणास्रोत भी थे। उनकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकेगी।"
स्थानीय प्रशासन का बयान
घटना की जानकारी मिलते ही जिले के अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। सीतामढ़ी के सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने कहा, "हमने तत्काल प्रभाव से इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।" हालांकि अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी क्यों हुई।
स्थानीय लोगों का आक्रोश और मांग
इस घटना के बाद स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता आक्रोशित हैं। ग्रामीणों ने कहा, "यह सिर्फ एक मौत नहीं है, यह सरकारी सिस्टम की विफलता है। अगर ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरत पूरी नहीं की जा सकती, तो ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों का क्या औचित्य है?"
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
सीतामढ़ी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लंबे समय से खराब मानी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार के पास योजनाएं तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन शून्य है।
शिक्षक मनोज कुमार की मौत न केवल एक व्यक्ति की जान जाने का मामला है, बल्कि यह घटना सिस्टम की विफलता को उजागर करती है। यह समय है कि सरकार और प्रशासन इन घटनाओं से सबक ले और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए।
स्थानीय जनता का यह भी कहना है कि अगर समय पर स्वास्थ्य केंद्रों में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं बार-बार होंगी और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
तिरहुत लाइव सीतामढ़ी ब्यूरो चीफ उमेश ठाकुर की रिपोर्ट
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