महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल का हार्ट अटैक से निधन
महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल का हार्ट अटैक से निधन
पटना :- बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के प्रशासक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल का आज सुबह कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। 74 वर्षीय किशोर कुणाल को अचानक हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल महावीर वत्सला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सुबह ही उनका निधन हो गया।
उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र ने की। बिहार और पूरे देश में धार्मिक और सामाजिक जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।
धार्मिक और सामाजिक सेवा में अद्वितीय योगदान
आचार्य किशोर कुणाल का नाम धार्मिक और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में बेहद सम्मानित था। महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव और बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए।
महावीर मंदिर ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने न केवल धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान और कई अन्य सामाजिक संस्थानों की स्थापना और संचालन का श्रेय उन्हें ही जाता है। इसके अलावा, पटना का प्रसिद्ध ज्ञान निकेतन स्कूल उनकी सोच और दूरदृष्टि का परिणाम है।
अयोध्या विवाद में मध्यस्थता की भूमिका
1990 के दशक में देश के सबसे विवादित मुद्दों में से एक अयोध्या विवाद के समाधान के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने उन्हें विश्व हिंदू परिषद और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के बीच मध्यस्थता के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया। इस भूमिका में उन्होंने अपने धैर्य और समझ से एक निष्पक्ष और शांतिपूर्ण समाधान की कोशिश की।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
किशोर कुणाल का जन्म 10 अगस्त 1950 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बरुराज गांव में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास और संस्कृत में स्नातक किया।
1972 में वे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में चयनित हुए और गुजरात कैडर में अपना करियर शुरू किया। अहमदाबाद में पुलिस उपायुक्त और पटना में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी कुशलता का परिचय दिया।
पुलिस सेवा से सामाजिक जीवन तक का सफर
किशोर कुणाल ने 2000 में आईपीएस सेवा से सेवानिवृत्ति ली और इसके बाद खुद को पूरी तरह से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में समर्पित कर दिया। उन्होंने 2000 से 2004 तक केएसडी संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार के लिए काम किया।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के प्रशासक के रूप में उन्होंने जातिवाद और भेदभाव जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए सुधारवादी कदम उठाए। उनके नेतृत्व में धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिरों और धर्मस्थलों की पारदर्शिता और विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।
धार्मिक और संस्कृत के विद्वान
किशोर कुणाल एक गहन धार्मिक और संस्कृत विद्वान थे। धार्मिक ग्रंथों और भारतीय संस्कृति में उनकी गहरी रुचि थी। उन्होंने अपने जीवन में धर्म को समाज सुधार और मानवता की सेवा का माध्यम बनाया।
उनके निधन से शोक की लहर
किशोर कुणाल के निधन की खबर से बिहार ही नहीं, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। महावीर मंदिर न्यास बोर्ड और बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य उनके निधन को अपूरणीय क्षति मान रहे हैं।
श्रद्धांजलि संदेश:
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, "आचार्य किशोर कुणाल का निधन न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका जीवन सामाजिक और धार्मिक सेवा का आदर्श था।"
उपमुख्यमंत्री ने कहा, "वे न केवल एक अच्छे प्रशासक थे, बल्कि समाज सुधार के लिए प्रतिबद्ध व्यक्ति भी थे।"
महावीर मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा, "आचार्य किशोर कुणाल के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनका मार्गदर्शन हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।"
अंतिम संस्कार की व्यवस्था
आचार्य किशोर कुणाल का अंतिम संस्कार आज शाम पटना में किया जाएगा। बड़ी संख्या में उनके अनुयायी, समाजसेवी और राजनेता उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित रहेंगे।
आचार्य किशोर कुणाल की विरासत हमेशा उनके द्वारा किए गए सामाजिक और धार्मिक सुधारों के रूप में जीवित रहेगी। उनका योगदान भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
तिरहुत लाइव न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें