रीगा चीनी मिल का जल्दबाजी में उद्घाटन, किसानों पर टूटा संकट का पहाड़
रीगा चीनी मिल का जल्दबाजी में उद्घाटन, किसानों पर टूटा संकट का पहाड़
सीतामढ़ी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 दिसंबर को रीगा चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ कर दिया, लेकिन इस उद्घाटन की जल्दबाजी ने किसानों को भारी परेशानियों में डाल दिया है। बिना तैयारी के उद्घाटन किए जाने के कारण किसानों का गन्ना अब तक नहीं तौला गया है। गन्ना तौलने की प्रक्रिया में देरी, तकनीकी खामियां, और चोरी की घटनाओं ने किसानों के संकट को और गहरा कर दिया है।
गन्ना तौलने में देरी और किसानों का नुकसान
विगत 26 दिसंबर को सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों पर गन्ना लादकर रीगा चीनी मिल पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके गन्ने की तौल तुरंत शुरू होगी, लेकिन मिल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उनका गन्ना यार्ड में पड़ा हुआ है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि यार्ड में रखे गन्ने का कुछ हिस्सा चोरी हो गया है। कई किसानों का कहना है कि उनके सैकड़ों क्विंटल गन्ने का अब तक कोई हिसाब नहीं है। इस देरी से गन्ने की गुणवत्ता खराब हो रही है और उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है।
तकनीकी खामियों के कारण नहीं शुरू हुई पेराई
सूत्रों से जानकारी मिली है कि मिल का बॉयलर अब तक पूरी तरह से तैयार नहीं है। स्टीम के पर्याप्त गर्म नहीं होने के कारण गन्ने की पेराई प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। किसानों का आरोप है कि अगर मिल संचालन के लिए तकनीकी तैयारियां पूरी नहीं थीं, तो पेराई सत्र का उद्घाटन क्यों किया गया?
कड़ाके की ठंड में किसानों की हालत दयनीय
पिछले 48 घंटे से किसान ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों के नीचे ठंड में रातें गुजारने को मजबूर हैं। उनकी दयनीय स्थिति किसी की नजर में नहीं आ रही है। कई किसान बारी-बारी से जागकर अपने गन्ने की सुरक्षा कर रहे हैं। ठंड के बावजूद वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मिल जल्द ही चालू होगी।
किसानों का गुस्सा और बढ़ता सवाल
किसानों ने सवाल उठाया है कि उद्घाटन समारोह के नाम पर उन्हें गन्ना लाने के लिए क्यों बुलाया गया, जब मिल तकनीकी रूप से तैयार ही नहीं थी? यह स्थिति मिल प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है। किसानों का कहना है कि यह उनकी मेहनत और समय दोनों की बर्बादी है।
प्रबंधन और प्रशासन पर सवाल
रीगा चीनी मिल प्रबंधन ने अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, किसानों ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सरकार की छवि पर असर
मुख्यमंत्री के उद्घाटन के बाद इस प्रकार की लापरवाही से सरकार की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों ने उम्मीद जताई थी कि चीनी मिल चालू होने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन वर्तमान हालात ने उनके संकट को और बढ़ा दिया है।
तिरहुत लाइव सीतामढ़ी ब्यूरो चीफ उमेश ठाकुर की रिपोर्ट
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